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Showing posts from October, 2020

हार्ट डिसीज, कैंसर और मोटापे से बचना है तो वीगन डाइट लें लेकिन इसे 3 महीने से ज्यादा लेते हैं तो ये बातें ध्यान रखें

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हार्ट डिसीज, कैंसर और मोटापे से बचना है तो वीगन डाइट लें लेकिन इसे 3 महीने से ज्यादा लेते हैं तो ये बातें ध्यान रखें https://ift.tt/3kPmHVR वजन घटाना चाहते हैं और हार्ट को हेल्दी रखना चाहते हैं तो वीगन डाइट को अपना सकते हैं। फल, सब्जी और अनाज से मिलने वाले न्यूट्रिएंट्स पेट को दुरस्त रखने के साथ कैंसर का खतरा घटाते हैं। लेकिन कई महीनों तक इस डाइट के सहारे रहना खतरनाक है। क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. सुरभि पारीक कहती हैं, जब भी इस डाइट की शुरुआत करें तो इसके साथ कुछ और सप्लिमेंट्स लें वरना कुछ पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। आज वर्ल्ड वीगन डे के मौके पर जानिए वीगन डाइट को अपनाने से पहले किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है... वीगन डाइट कैंसर का खतरा घटाती है, रिसर्च में साबित हुआ अमेरिका में हुई एक स्टडी बताती है वीगन डाइट वजन घटाने में कारगर है। इसमें फैट बेहद कम मात्रा में होने के कारण ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है और हृदय रोगों का खतरा घटता है। फल और सब्जियों के जरिए शरीर में एंटीऑक्सीडेंट्स काफी मात्रा में पाए जाते हैं जो ब्लड शुगर भी कंट्रोल में रखते हैं और इम्युनिटी को बढ़ाते ...

10 साल में ब्रेस्ट कैंसर के मामले 30% तक बढ़े, ब्रेस्ट में ये बदलाव दिखें तो अलर्ट हो जाएं; शुरुआती स्टेज में इलाज आसान है

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10 साल में ब्रेस्ट कैंसर के मामले 30% तक बढ़े, ब्रेस्ट में ये बदलाव दिखें तो अलर्ट हो जाएं; शुरुआती स्टेज में इलाज आसान है https://ift.tt/3oLMcKf देश में पिछले 10 साल में कैंसर के मामले 30 फीसदी तक बढ़े हैं। हर साल अक्टूबर माह को ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ के तौर पर मनाया जाता है। बावजूद इसके देश में 80 फीसदी महिलाएं डॉक्टर्स के पास कैंसर की तीसरी या चौथी स्टेज में पहुंचती हैं। मेदांता की ब्रेस्ट कैंसर सविसेज की डायरेक्टर डॉ. कंचन कौर कहती हैं, भारत में ज्यादातर महिलाएं मानती हैं कि परिवार में ब्रेस्ट कैंसर कभी किसी को नहीं हुआ, इसलिए मुझे भी नहीं हो सकता। यह गलत धारणा है। ब्रेस्ट कैंसर के 90 फीसदी मामले ऐसी महिलाओं में सामने आते हैं, जिनके घर में कभी किसी को कैंसर नहीं हुआ। ब्रेस्ट कैंसर से कैसे बचें और किन बातों का ध्यान रखें, बता रही हैं डॉ. कंचन कौर... ब्रेस्ट में ये बदलाव दिखने पर अलर्ट हो जाएं? स्तन में गांठ, स्तन के निप्पल के आकार या स्किन में बदलाव, स्तन का सख्त होना, यहां पर किसी घाव का लम्बे समय ठीक न होना और निप्पल से रक्त या लिक्विड निकलना इसके लक्षण हैं। इसके अलावा...

असम में 75 हजार रु. किलो बिकने वाली गोल्ड चायपत्ती की कहानी, जानिए हर साल यह क्यों रिकॉर्ड बनाती है

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असम में 75 हजार रु. किलो बिकने वाली गोल्ड चायपत्ती की कहानी, जानिए हर साल यह क्यों रिकॉर्ड बनाती है https://ift.tt/3mDvzhN असम में खास तरह की दुर्लभ प्रजाति वाली चायपत्ती ने फिर रिकॉर्ड बनाया है। मनोहारी गोल्ड टी खास तरह की चायपत्ती है, जिसे गुवाहाटी चाय नीलामी केंद्र पर 75 हजार रुपए प्रति किलो की कीमत पर बेचा गया है। यह असम में इस साल दर्ज चाय की सबसे ऊंची कीमत है। इस चायपत्ती की पैदावार करने वाले मनोहारी टी स्टेट का कहना है, इस साल इसकी केवल 2.5 किलो पैदावार हुई। इसमें से 1.2 किलो की नीलामी हुई है। महामारी के बीच चाय की इतनी कीमत मिलना इंडस्ट्री के लिए राहत की बात है। ये तो हुई नीलामी की बात अब ये भी समझ लीजिए कि यह चायपत्ती इतनी खास क्यों है... चाय को तोड़ने का तरीका भी है अलग मनोहारी टी स्टेट के डायरेक्टर राजन लोहिया कहते हैं, ये खास तरह की चायपत्ती होती है जिसे सुबह 4 से 6 बजे के बीच सूरज की किरणें जमीन पर पड़ने से पहले तोड़ा जाता है। इसका रंग हल्का मटमैला पीला होता है। यह चायपत्ती अपनी खास तरह की खुशबू के लिए जानी जाती है। इसमें कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं। ...

वर्कआउट के बाद चक्कर, उबकाई, पेट और सीने के दर्द से बचना है तो पानी कब-कितना पिएं एक्सपर्ट से समझें

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वर्कआउट के बाद चक्कर, उबकाई, पेट और सीने के दर्द से बचना है तो पानी कब-कितना पिएं एक्सपर्ट से समझें https://ift.tt/34HmHli फिट रहना जितना जरूरी है उतना ही जरूरी है, वर्कआउट के दौरान पानी पीने का ध्यान रखना। वर्कआउट से पहले, उस दौरान और बाद में कितना पानी पिएं, इसे समझना जरूरी है वरना इसका बुरा असर शरीर पर पड़ेगा। अधिक पानी पीने पर पेट दर्द और उबकाई हो सकती है और पानी कम लेते हैं तो चक्कर आ सकते हैं। साओल हार्ट सेंटर, नई दिल्ली के डायरेक्टर डॉ. बिमल छाजेड़ बता रहे हैं वर्कआउट से पहले, एक्सरसाइज के दौरान और वर्कआउट के बाद कब-कितना पानी पिएं। वर्कआउट से पहले : पानी उतना पिएं कि गला तर हो जाए कुछ लोग वर्कआउट शुरू करने से तुरंत पहले पानी पीते हैं ताकि वर्कआउट के दौरान पानी की ज़रूरत न महसूस हो। वर्कआउट के लिए बॉडी का हाइड्रेटेड रहना बेशक ज़रूरी है लेकिन ध्यान रहे कि इसके तुरंत पहले पानी पीने से स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। सही मायनों में पानी वर्कआउट से आधा घंटा पहले पीना चाहिए। एक साथ अधिक पानी न पिएं क्योंकि वर्कआउट करने में परेशानी आ सकती है। केवल गला तर करने लायक़ ही पानी लें। वर्कआउ...

डॉक्टर्स ने मरीज की आंख से निकाला 20 जिंदा कीड़ों का एक गुच्छा, एक साल से परेशान था मरीज

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डॉक्टर्स ने मरीज की आंख से निकाला 20 जिंदा कीड़ों का एक गुच्छा, एक साल से परेशान था मरीज https://ift.tt/3mHOuZ3 चीन में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। 60 साल के एक मरीज की आंखों में कीड़ों का गुच्छा मिला है। ये सभी जिंदा थे। डॉक्टर्स ने आंख की पलक से 20 जिंदा कीड़े निकाले। कुछ महीने पहले आंखों में अजीब सी हरकत महसूस होने पर मरीज डॉक्टर्स से सलाह लेने पहुंचा था। यहां सर्जरी के दौरान चौंकाने वाली बात सामने आई। मरीज को थकान महसूस हो रही थी चीनी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये जिंदा कीड़े मरीज की आंख में करीब सालभर से थे। मरीज को आंखों में अजीब सा महसूस होता था। उसे लगता था कि थकान के कारण ऐसा हो रहा है। डॉक्टर्स ने आंखों की जांच की तो सामने आया कि दाईं पलक के नीचे छोटे-छोटे कीड़ों का एक गुच्छा मिला। आउटडोर वर्कआउट के दौरान पहुंचे कीड़े कीड़ों को निकालने वाले डॉक्टर्स का मानना है कि जो कीड़े पलकों में मिले हैं उनमें लार्वे थी थे। मरीज का नाम वैन है उसे स्पोर्ट्स एक्टविटी का काफी शौक है। ये कीड़े मरीज की आंखों में तब पहुंचे जब वह आउटडोर वर्कआउट करता था। धीरे-धीरे मरीज की हालत बिगड़ती गई...

एक साल में 33 हजार किमी. का चक्कर लगाकर लौटी चिड़िया, अब इन्हें रेडियो टैग से बचाने की तैयारी; जानिए कैसे

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एक साल में 33 हजार किमी. का चक्कर लगाकर लौटी चिड़िया, अब इन्हें रेडियो टैग से बचाने की तैयारी; जानिए कैसे https://ift.tt/32dmi8D एक साल में 29 हजार किलोमीटर का चक्कर लगाकर एक चिड़िया मणिपुर वापस लौटी है। इस चिड़िया का नाम 'इरांग' है। नवम्बर 2019 में ऐसी पांच चिड़िया मणिपुर के तमेंगलोंग जिले से छोड़ी गई थीं। इनमें से तीन की मौत हो गई। लोकेशन की मॉनिटरिंग करने के लिए इनमें रेडियो-टैग लगाया गया था। इनमें इयांग के अलावा एक और चिड़िया चियूलॉन हाल ही में वापस लौटी। चियूलॉन ने 33 हजार किलोमीटर की दूरी पूरी की है। पिछले साल इनके उड़ान भरने से पहले मणिपुर के वन विभाग ने भारतीय वन्यजीव संस्थान के साथ मिलकर पांच बाजों को रेडियो टैग लगाया था। 4 महीने भारत में रहते हैं कबूतर के आकार की आमर फॉल्कंस यानी इयांग बर्ड एक प्रवासी पक्षी है। यह साइबेरिया का रहने वाला है। यह चिड़िया सर्दियों से पहले भारत के लिए उड़ान भरती हैं और उत्तर-पूर्व भारत में ये करीब दो महीने तक रहती हैं। इसके बाद ये दक्षिण अफ्रीका के लिए उड़ान भरती हैं। वहां, ये करीब 4 महीने रहती हैं। क्यों शुरू हुई महिम और कैसे काम करता है र...

कैसे बनती है चांदनी और चांद की रोशनी में क्यों रखते हैं खीर, एक्सपर्ट से समझें इसका विज्ञान

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कैसे बनती है चांदनी और चांद की रोशनी में क्यों रखते हैं खीर, एक्सपर्ट से समझें इसका विज्ञान https://ift.tt/3kGZhC3 आज शरद पूर्णिमा है। चंद्रमा बच्चे के लिए चंदा मामा, विज्ञान के लिए धरती का एकमात्र उपग्रह और मान्यताओं में अमृत वर्षा करने वाला देवता कहा गया है। ग्रंथों के मुताबिक, शरद पूर्णिमा की रात में आकाश से अमृत बरसता है। सूरज की झुलसाने वाली गर्मी के बाद पूर्णिमा की रात में पूर्ण चंद्र की किरणें शीतलता बरसाती हैं, जो तन-मन की उष्णता कम करती है। शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी संपूर्ण 16 कलाओं से परिपूर्ण रहता है। पूर्णिमा तिथि का स्वामी भी स्वयं चंद्रमा ही है, इसलिए उसकी किरणों से इस रात अमृत की वर्षा होने की मान्यता है। आयुर्वेद के अनुसार रातभर इसकी रोशनी में रखी खीर खाने से रोग दूर होते हैं। चांद की रोशनी से हमारी सेहत कैसे प्रभावित होती है, यही समझने के लिए दैनिक भास्कर ऐप ने विशेषज्ञों से बात की। इंटर-यूनिवर्सिटी ऑफ एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स के प्रोफेसर्स और आयुर्वेद विशेषज्ञ से जानिए इसकी पूरी कहानी... कैसे बनती है चांदनी एस्ट्रोनॉमी विशेषज्ञ प्रो. श्याम टं...

WHO ने कहा- कोरोना महामारी नहीं, संक्रमितों को आइसोलेशन और क्वारेंटाइन होने की जरूरत भी नहीं? जानिए सच्चाई

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WHO ने कहा- कोरोना महामारी नहीं, संक्रमितों को आइसोलेशन और क्वारेंटाइन होने की जरूरत भी नहीं? जानिए सच्चाई https://ift.tt/34zE8UK क्या हो रहा है वायरल : दावा किया जा रहा है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO) ने पहले कोरोना वायरस को महामारी बताकर अब अपनी ही बात से यू-टर्न ले लिया है। वायरल मैसेज के साथ एक ही कार्यक्रम के अलग-अलग वीडियो भी वायरल हो रहे हैं। देखने पर ये एक कॉन्फ्रेंस लगती है, जिसमें वक्ता दावा कर रहे हैं कि कोरोना वायरस महामारी नहीं है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि ये लोग WHO के पदाधिकारी हैं। ## वीडियो के साथ मैसेज वायरल हो रहा है - Breaking news: WHO has completely taken a U-turn and now says that Corona patient neither needs to be isolated, nor quarantined, nor needs social Distancing, and it cannot even transmit from one patient to another। मैसेज का हिंदी अनुवाद है - WHO ने पूरी तरह से यू-टर्न ले लिया है। अब WHO का कहना है कि कोरोना रोगी को आईसोलेट या क्वारेंटाइन होने की जरूरत नहीं है। सोशल डिस्टेंसिंग की भी अब कोई जरूरत नहीं है। कोरोना एक मरीज से दूस...

घर में लगाएं पिप्पली, अश्वगंधा और गिलोय जैसे पौधे ये डेंगू-मलेरिया से बचाएंगे और हृदय रोगों का खतरा घटाएंगे

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घर में लगाएं पिप्पली, अश्वगंधा और गिलोय जैसे पौधे ये डेंगू-मलेरिया से बचाएंगे और हृदय रोगों का खतरा घटाएंगे https://ift.tt/3jF7N3d आयुर्वेद में ऐसे कई पौधे बताए गए हैं जिनकी पत्तियों और जड़ों से कई तरह की बीमारियों का इलाज किया जाता है। इनमें से कुछ पौधों को घर के गार्डन में उगा सकते हैं। इन्हें लगाना भी आसान है और अधिक देखभाल की जरूरत भी नहीं होती। बागवानी विशेषज्ञ आशीष कुमार बता रहे हैं, घर के बगीचे में औषधीय पौधे कैसे लगाएं, इन्हें कैसे इस्तेमाल करें और ये कितनी तरह से फायदा पहुंचाते हैं... ब्राह्मी ब्राह्मी : दिमाग तेज करती है और बच्चों में एकाग्रता बढ़ाती है कैसे लगाएं : इसका पौधा जमीन पर फैलकर बड़ा होता है, यह आसानी से किसी भी मिट्टी में लग जाता है। कैसे मिलेगा फायदा : इसकी 4-5 पत्तियों को सुबह खाली पेट चबाकर, पानी पिएं। रस निकालकर भी ले सकते हैं। इसकी तासीर ठंडी होती है इसलिए सर्दी में पत्तियों के रस को काली मिर्च के साथ लें। फायदे : ब्राह्मी दिमाग के लिए अधिक फायदेमंद है। बच्चों में एकाग्रता की कमी और बड़ी उम्र में भूलने की बीमारी में इसकी पत्तियों को चबाकर खाते ...

पहले हफ्ते में कोरोना के 5 या इससे अधिक लक्षण दिखे तो मरीज में लम्बे समय तक वायरस का असर दिख सकता है

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पहले हफ्ते में कोरोना के 5 या इससे अधिक लक्षण दिखे तो मरीज में लम्बे समय तक वायरस का असर दिख सकता है https://ift.tt/2HNcuuE कोरोना का संक्रमण होने के बाद पहले हफ्ते में पांच या इससे अधिक तरह के लक्षण दिखते हैं तो यह इशारा है कि मरीज में लम्बे समय कोरोना का असर रह सकता है। यह दावा किंग्स कॉलेज लंदन की रिसर्च में किया गया है। रिसर्च कहती है, संक्रमण के बाद अगर पहले हफ्ते में थकान, सिरदर्द, सांस लेने में तकलीफ, आवाज भारी होना, मांसपेशियों और शरीर में दर्द जैसे लक्षण दिखते हैं तो मरीज लम्बे समय के कोरोना से परेशान रह सकता है। इसे लॉन्ग कोविड भी कहते हैं। लम्बे समय कोविड का साइडइफेक्ट रिसर्च कहती है, ऐसे मरीज जो कोरोना का संक्रमण होने के 4 से 8 हफ्ते बाद तक रिकवर नहीं कर पाते उनमें पोस्ट कोविड का खतरा बढ़ता है। पोस्ट कोविड यानी लम्बे समय तक कोरोना के साइडइफेक्ट से जूझना। रिकवरी के बाद ऐसे मरीजों में खांसी, सांस लेने में तकलीफ, मांसपेशियों में दर्द और अधिक थकान जैसे लक्षण दिखते हैं। 40 हजार मरीजों पर हुई रिसर्च ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने कोरोना के 40 हजार मरीजों पर रिसर्च की। इसमें ब...

फ्लू की वैक्सीन कोरोना से संक्रमण का खतरा 39% तक घटा सकती है, अलर्ट रहें क्योंकि सर्दी में फ्लू और कोरोना दोनों का खतरा

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फ्लू की वैक्सीन कोरोना से संक्रमण का खतरा 39% तक घटा सकती है, अलर्ट रहें क्योंकि सर्दी में फ्लू और कोरोना दोनों का खतरा https://ift.tt/3oCe6bh फ्लू की वैक्सीन कोरोना के संक्रमण को घटाने में मदद कर सकती है। कोरोना के मरीजों में यह कैसे काम करेगी, वैज्ञानिकों ने इसे भी समझाया है। रिसर्च करने वाली नीदरलैंड्स की रेडबाउंड यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के इम्यूनोलॉजिस्ट मिहाई नेटी कहते हैं, 2019-2020 की सर्दियों में जिन लोगों को फ्लू की वैक्सीन लगी थी उन पर कोरोना के असर को जाना गया। रिसर्च में सामने आया कि जिन लोगों को फ्लू की वैक्सीन दी गई उनमें कोरोना से संक्रमित होने का खतरा 39 फीसदी तक कम था। यह है रिसर्च का साइंस वैज्ञानिकों का कहना है, फ्लू की वैक्सीन शरीर में इम्युनिटी यानी वायरस से लड़ने की क्षमता बढ़ाती है। यह खास तरह के साइटोकाइन स्टॉर्म को भी रोकने की कोशिश करती है। साइटोकाइन स्टॉर्म ऐसी स्थिति को कहते हैं, जब कोरोना का संक्रमण होने के बाद बीमारी से लड़ने वाला इम्यून सिस्टम बेकाबू होने लगता है। यह शरीर को नुकसान पहुंचाने लगता है। सर्दियों में फ्लू की वैक्सीन क्यों जरूरी अमेरिकी ...

हार्ट अटैक से मौत का खतरा कम करना है तो मछली, अखरोट, सोयाबीन और बादाम खाएं

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हार्ट अटैक से मौत का खतरा कम करना है तो मछली, अखरोट, सोयाबीन और बादाम खाएं https://ift.tt/34xm8KI हृदय रोगों को रोकना चाहते हैं या हार्ट अटैक के बाद मौत का खतरा घटाना चाहते हैं तो मछली, अखरोट, सोयाबीन और बादाम खाएं। ऐसा खानपान दिल को दुरुस्त रखता है। इस पर वैज्ञानिकों ने भी मुहर लगाई है। अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी में पब्लिश रिसर्च कहती है, रोजाना डाइट में ओमेगा-3 आइकोसा-पेंटानोइक एसिड और अल्फा-लिनोलिक एसिड की अधिक मात्रा वाले फूड खाते हैं तो दिल की बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। हार्ट अटैक से जूझ रहे 944 मरीजों पर हुई रिसर्च रिसर्च करने वाले अमेरिकी वैज्ञानिकों के मुताबिक, ओमेगा-3 आइकोसा-पेंटानोइक एसिड और अल्फा-लिनोलिक एसिड में ऐसी खूबियां जो दिल को सुरक्षित रखने में मदद करती हैं। यह रिसर्च 944 हार्ट अटैक के सीरियस मरीजों पर कई गई। ये ऐसे मरीज थे जिनमें हार्ट की मेजर आर्टरी ब्लॉक थी। ब्लड सैम्पल में ओमेगा-3 का लेवल देखा गया रिसर्चर डॉ. एलेक्स साला-विला के मुताबिक, रिसर्च के दौरान 78 फीसदी पुरुषों हॉस्पिटल में भर्ती करने के दौरान ब्लड सैम्पल लिया गया। ब्लड में ओमेगा-3 का ...

दर्द वाली जगह पर इंजेक्शन से दी दवा; चक्कर आना, पेट दर्द, उल्टी जैसे साइड इफेक्ट नहीं दिखे

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दर्द वाली जगह पर इंजेक्शन से दी दवा; चक्कर आना, पेट दर्द, उल्टी जैसे साइड इफेक्ट नहीं दिखे https://ift.tt/2TscHpu भारतीय वैज्ञानिकों ने गठिया के मरीजों को दवा के साइड इफेक्ट से बचाने का नया तरीका खोजा है। दवा को सीधे दर्द और सूजन वाली जगह इंजेक्ट करने पर मरीजों में उल्टी, सिरदर्द जैसे साइड इफेक्ट नजर नहीं आए। साथ ही इसका असर भी लंबे समय तक रहा। पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर भूपिंदर कपूर ने इस पर रिसर्च की है। वो कहते हैं कि गठिया में आमतौर पर मरीजों को सल्फापायरीडाइन दवा दी जाती है। इसके कई साइडइफेक्ट होते हैं। दवा इंजेक्ट करने से वो सीधे दर्द वाले हिस्से तक पहुंचती है और यह तरीका सुरक्षित है। उन्होंने बताया," सल्फापायरीडाइन गठिया की तीसरी सबसे पुरानी दवा है। लंबे समय तक इस दवा को लेने से चक्कर आना, पेट में दर्द, उल्टी होना, जी मिचलाना और स्किन पर चकत्ते पड़ने जैसे साइडइफेक्ट नजर आते हैं। दर्द वाली जगह पर दवा इंजेक्ट करने से यह शरीर में फैले बिना प्रभावित हिस्से को फायदा पहुंचाती है।इस नए तरीके का ट्रायल भी किया जा चुका है।" असर नजर आया,सूजन कम हुई र...