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Showing posts from November, 2020

हर 100 सेकंड में एक बच्चा HIV से संक्रमित हो रहा, कोरोनाकाल में 60% ट्रीटमेंट अटका; देश में सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र में

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हर 100 सेकंड में एक बच्चा HIV से संक्रमित हो रहा, कोरोनाकाल में 60% ट्रीटमेंट अटका; देश में सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र में https://ift.tt/39xB1PY संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट कहती है, हर 100 सेकंड में एक बच्चा HIV से संक्रमित हो रहा है। पिछले साल दुनियाभर में HIV से 3,20,000 बच्चे और टीनएजर्स संक्रमित हुए। इनमें से 1,10,000 बच्चों की मौत हो गई। इसके बावजूद कोरोनाकाल में HIV के मरीजों के ट्रीटमेंट पर बुरा असर पड़ा है। मरीजों का ट्रीटमेंट छूटा और जांच भी ठप हुई। आज वर्ल्ड एड्स डे है, इस मौके पर जानिए कोरोनाकाल में HIV मरीजों पर क्या असर पड़ा.... कोरोना और HIV मरीजों की चुनौतियां, 4 बड़ी बातें 1. इलाज और टेस्टिंग 60 फीसदी तक घटी संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोनाकाल में HIV यानी ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस से संक्रमित बच्चों के इलाज और टेस्टिंग में 60 फीसदी तक गिरावट आई। एंटी-रेट्रोवायरल थैरेपी भी 50 फीसदी मरीजों को नहीं दी जा सकी। बच्चों की टेस्टिंग भी 10 फीसदी कम हुई। पिछले कुछ महीनों में हालात सुधरे हैं लेकिन 2020 के टार्गेट से दूर हैं। 2. 73 देशों ने बताया, दवाओं क...

अस्थमा रोगी दिन में 3 बार गर्म पानी की भाप लें, मास्क लगाएं और इन्हेलर पास रखें; याद रखें ये 10 बातें

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अस्थमा रोगी दिन में 3 बार गर्म पानी की भाप लें, मास्क लगाएं और इन्हेलर पास रखें; याद रखें ये 10 बातें https://ift.tt/3q9iL5z सर्दियां शुरू हो चुकी हैं। संक्रमण के आंकड़े बढ़ रहे हैं। एयर पॉल्यूशन का लेवल भी बढ़ा हुआ है। इन तीनों बातों का सीधा असर अस्थमा के रोगियों पर भी पड़ रहा है। जयपुर की सांस रोग विशेषज्ञ डॉ. निष्ठा सिंह कहती हैं, अस्थमा के ऐसे मरीज जिनमें बीमारी कंट्रोल में नहीं रहती उनमें कोरोना होने पर हालत और बिगड़ती है। सर्दियों में इसके मामले बढ़ सकते हैं, इसलिए अस्थमा के रोगियों को कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है ताकि इसके अटैक रोके जा सकें। जानिए, महामारी के बीच अस्थमा के रोगी कैसे रखें अपना ख्याल... कोरोना ने अस्थमा रोगियों की कितनी दिक्कतें बढ़ाईं डॉ. निष्ठा कहती हैं, कोरोनाकाल में अस्थमा के ऐसे मरीजों को भी इन्हेलर लेना पड़ रहा है जिन्होंने इससे पहले इन्हेलर लेना छोड़ दिया था या जरूरत नहीं पड़ती थी। इस महामारी में ध्यान रखने वाली सबसे जरूरी बात है कि दवाएं और इन्हेलर मत बंद करें। दवाओं को बदल रहे हैं तो भी डॉक्टरी सलाह जरूर लें। कई बार मरीज इन्हेलर खरीदकर अपने आप इस्तेमाल...

दिमागी उलझन दूर करना है तो सीढ़ियां चढ़ने की आदत डालें, यह आदत आपको एनर्जेटिक रखेगी

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दिमागी उलझन दूर करना है तो सीढ़ियां चढ़ने की आदत डालें, यह आदत आपको एनर्जेटिक रखेगी https://ift.tt/3fQDm9U दिमागी उलझन दूर करना है और खुद को एनर्जेटिक रखना है तो सीढ़ियों का इस्तेमाल ज्यादा करें। महामारी के दौर में भी यह आदत मेंटल डिसऑर्डर को घटाती है। यह दावा जर्मनी के सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ ने किया है। रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है, जब हम सीढ़ियां चढ़ते हैं तो एनर्जी से भर जाते हैं और तरोताजा महसूस करते हैं। यह आदत हमारी सेहत को दुरुस्त रखती है। महामारी में जगह घर की सीढ़ियों का प्रयोग करें सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ के प्रोफेसर हेक टोस्ट कहते हैं, महामारी के इस दौर में फिलहाल लोग अधिक बाहर निकलने से बच रहे हैं जिससे सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। इसके लिए सीढ़ियां चढ़ना बेहतर विकल्प है। 67 लोगों पर सीढ़ियां चढ़ने के असर को देखा गया सीढ़ियां चढ़ने से कितना फायदा होता है, इसे समझने के लिए 67 लोगों पर सात दिन तक रिसर्च की गई। रिसर्च में सामने आया कि ऐसी एक्टिविटी करने के तुरंत बाद लोग एनर्जी से भरे नजर आए। इससे उनकी मेंटल हेल्थ पर पॉजिटिव असर पड़ा। ऐसी ही रिस...

पहली बार देश में शहर के नाम पर रखा मेढ़क का नाम, गड्‌ढा खोदने के लिए जाना जाता है यह ब्राउन मेढक

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पहली बार देश में शहर के नाम पर रखा मेढ़क का नाम, गड्‌ढा खोदने के लिए जाना जाता है यह ब्राउन मेढक https://ift.tt/2VuyEp7 जमीन में गड्‌ढा खोदने वाले एक मेढक का नाम बेंगलुरु के नाम पर रखा गया है। इसे 2018 में खोजा गया था। यह पहली बार है जब देश किसी शहर के नाम पर मेढक का नाम रखा गया है। मेढक की इस नई प्रजाति का नाम 'स्फेरोथिका बेंगलुरु' रखा गया है। इसे खोजने वाले माउंट कार्मल कॉलेज के प्रोफेसर दीपक पी. ने मेढक की तस्वीरें जुलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया में भेजी हैं। इस पर और रिसर्च की जानी है। मेढक का नामकरण करने वाली वैज्ञानिकों की टीम का कहना है, मेढकों के रहने की प्राकृतिक जगह को दोबारा तैयार करने की जरूरत है। यह मेढक बेंगलुरु शहर के राजनकुंटे में एक बंजर जगह पर मिला था। वैज्ञानिकों ने इंसान में नया अंग खोजा, कहा; नाक के पिछले हिस्से में मिला यह अंग कैंसर के इलाज में मदद कर सकता है भारत में जल-जमीन पर रहने वाले जीवों की खोज बढ़ीं मेढक पर हुई रिसर्च इंटरनेशनल जर्नल जूटॉक्सा में पब्लिश हुई है। रिसर्च कहती है, जमीन और पानी दोनों जगह रहने वाले ऐसे एम्फीबियन्स जीवों की खोज भारत में...

100 साल के झेंग ने लम्बी उम्र का सीक्रेट स्माकिंग और अल्कोहल को बताया

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100 साल के झेंग ने लम्बी उम्र का सीक्रेट स्माकिंग और अल्कोहल को बताया https://ift.tt/3ldZlIO अमूमन 100 साल या इससे अधिक समय तक जीने वाले इंसान लम्बी उम्र का सीक्रेट खुशहाली को बताते हैं लेकिन चीन में रहने वाले झेंग केमिन का दावा चौंकाने वाला है। झेंग केमिन ने कुछ महीने पहले अपना 100वां जन्मदिन मनाया। झेंग ने अपनी लम्बी उम्र का सीक्रेट सिगरेट, स्मोकिंग और जंक फूड को बताया। झेंग कहते हैं, मुझे मालूम है डॉक्टर्स मेरी बात को नहीं मानेंगे लेकिन मैंने जीवनभर यही किया है। पांच पीढ़ियों के साथ रह रहे मैं क्या खा-पी रहा हूं, यह कभी नहीं सोचा झेंग घर में अपनी पांच पीढ़ियों के साथ रह रहे हैं। जन्मदिन पर उन्होंने लम्बी उम्र का सीक्रेट बताते हुए उन्होंने कहा, मैं क्या खा रहा हूं, क्या पी रहा हूं, यह सोचकर परेशान नहीं होता। न मैं चीजों से चिढ़ता हूं। 90 साल की उम्र के बाद शराब की मात्रा घटाई मैं सिगरेट और शराब को कंट्रोल नहीं कर पाया लेकिन 90 साल की उम्र के बाद शराब पीने की मात्रा घटाई। मैं नहीं चाहता था कि काम के दौरान कोई दुर्घटना हो, इसलिए ऐसा किया। फिलहाल, रोज एक सिगरेट का पैकेट खत्म कर ...

लकड़ी के धुएं ने डैमेज किए भारतीयों के फेफड़े, ऑक्सीजन पहुंचने की क्षमता घटी; सर्दियों में बढ़ते हैं मामले

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लकड़ी के धुएं ने डैमेज किए भारतीयों के फेफड़े, ऑक्सीजन पहुंचने की क्षमता घटी; सर्दियों में बढ़ते हैं मामले https://ift.tt/33teLCW लकड़ी और दूसरे अधिक धुआं पैदा करने वाले ईधन को जलाते हैं तो आप फेफड़े डैमेज कर रहे हैं। यह अलर्ट वैज्ञानिकों ने जारी किया है। नॉर्थ अमेरिका में रेडियोलॉजिकल सोसायटी की एनुअल मीटिंग में वैज्ञानिकों ने कहा, सांस के जरिए बड़ी मात्रा में धुएं में मौजूद प्रदूषण फैलाने वाले तत्व और बैक्टीरियल टॉक्सिन सीधे तौर पर फेफड़ों में पहुंच रहे हैं और डैमेज कर रहे हैं। हर साल धुएं में खाना बनाने से 40 लाख मौतें मीटिंग में फेफड़ों पर रिपोर्ट पेश की गई और बताया गया कि हर साल ऐसे बायोमास फ्यूल के जलने से 40 लाख मौतें हो रही हैं। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अभिलाष किज्जाके कहते हैं, ऐसे मामले सामने आने की दो वजह हैं। पहली, लोग आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं और दूसरी, धुएं से डैमेज होते फेफड़ों की जानकारी से बेखबर हैं। दुनियाभर में 300 करोड़ लोग इसी तरह खाना बनाते हैं। 23 भारतीयों पर की रिसर्च रिसर्च में शामिल लोवा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एरिक ए. हॉफमैन कहते हैं, हमने इसका पत...

Wedding Season: वेडिंग सीजन में कैसे रहें कोरोना से सुरक्षित! बरते ये बड़ी सावधानियां

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Wedding Season: वेडिंग सीजन में कैसे रहें कोरोना से सुरक्षित! बरते ये बड़ी सावधानियां https://ift.tt/37dkIoN नई दिल्ली। एकादशी के खत्म होते ही शादियों का सीजन (Wedding season) शुरू हो चुका है लोग शादियों में जानें को तैयार पूरी तरह से तैयार हैं। लेकिन इन दिनों तेजी से बढ़ रहे कोरोना को देखते हुए अब खतरा बढ़ने का अंदेशा ज्यादा होने लगा है। सर्दियों में कोरोना (Corona in Winters) के बढ़ने से होने वाली तबाही की चेतावनी एक्सपर्ट पहले ही दे चुके हैं। और किसी भी समारोह में हो रही भीड़ को रोकने के लिए राज्य सरकारों के द्वारा गाइडलाइंस भी जारी की जा चुकी हैं। शादियों के समय में सभी को हिदायत दी गई है कि 100 से ज्यादा लोगों के शामिल होने की अनुमति नहीं है। लेकिन इसके बाद भी शादी-समारोह के बीच कोरोना संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए कुछ विशेष सावधानियां बरतना काफी आवश्यक है। जो आप अपनी सेफ्टी के लिए कर सकते है। वेंटिलेशन की सुविधा: एक्सपर्ट कहते हैं कि शादी-समारोह का आयोजन खुली जगहों पर करें, बंद जगहों पर करने से कोरोना फैलने के खतरे ज्यादा होते है। इसलिए ऐसी जगहों पर कार्यक्रम करें जहां...

क्या है Anushka Sharma की खूबसूरत त्वचा का राज? एक्ट्रेस ने किया खुलासा

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क्या है Anushka Sharma की खूबसूरत त्वचा का राज? एक्ट्रेस ने किया खुलासा https://ift.tt/2Jmtk4h नई दिल्ली। बॉलीवुड में हर एक्ट्रेस का चेहरा हमेशा ग्लो करता रहता है। उनकी खूबसूरती को देख लोग उनकी झलक पाने के लिए मर मिटने को तैयार हो जाते है। इन्ही में से एक एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा (Anushka Sharma ) की भी खूबसूरती के लोग कायल है। वो अपनी एक्टिंग के साथ साथ अपनी खूबसूरती के लिए भी जानी जाती है। उनके चेहरे का ग्लो और फ्लॉलेस उसकी त्वचा पर अलग से नजर आता है। अनुष्का शर्मा ने बताया है कि इसके पीछे का राज हेल्दी डाइट और त्वचा की सही देखभाल है। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अनुष्का ने अपनी ब्यूटी सीक्रेट्स का खुलासा किया। अनुष्का ने बताया कि वह अपनी स्किन को डिटॉक्स करने के लिए वो प्राकृतिक चीजों से बने प्रोडक्ट का उपयोग करती हैं। इसके लिए वो नीम फेस मास्क का यूज करती हैं जो उनकी स्किन को साफ रखता है और ग्लो बनाए रखने में मदद करता है। डिटॉक्सिफाइंग बाथ काम के दौरान जब अनुष्का को तनाव और थकान ज्यादा महसूस होती है तो उस समय वो डिटॉक्सीफाइंग बाथ लेती है इससे त्वचा की गंदगी तो दूर होती ही ...

हार्ट और डायबिटीज के मरीजों में कोरोना होने पर बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल मौत का खतरा बढ़ाता है, इसे कंट्रोल करें

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हार्ट और डायबिटीज के मरीजों में कोरोना होने पर बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल मौत का खतरा बढ़ाता है, इसे कंट्रोल करें https://ift.tt/3oekzbJ हार्ट और डायबिटीज के मरीजों में कोरोना होने पर मौत का खतरा क्यों ज्यादा है, इसे चीनी वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में समझाया है। रिसर्च के मुताबिक, इसकी बड़ी वजह कोलेस्ट्रॉल है। कोरोना के मामले में अक्सर मरीज में कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ता है। यह कोरोनावायरस को संक्रमण फैलाने में मदद करता है। संक्रमण के बाद वायरस कोलेस्ट्रॉल के कणों के साथ मिलकर खास तरह का रिसेप्टर SR-B1 तैयार करता है। ऐसा होने पर संक्रमण का लेवल और जान का खतरा दोनों बढ़ता है। आसान भाषा में समझें तो कोलेस्ट्रॉल जितना ज्यादा होगा जान का जोखिम भी उतना ही बढ़ेगा। संक्रमण फैलाने में कोलेस्ट्रॉल कोरोना की कैसे मदद करता है रिसर्च करने वाले चाइनीज एकेडमी ऑफ मिलिट्री साइंस के वैज्ञानिकों का कहना है, कोलेस्ट्रॉल इंसान के शरीर की हर कोशिकाओं में पाया जाता है इसकी मदद से SR-B1 रिसेप्टर टार्गेट करता है। संक्रमण फैलाने वाले कोरोना के स्पाइक प्रोटीन के दो हिस्से होते हैं- सबयूनिट-1 और सबयूनिट-2। कोलेस्ट्र...

कोरोना से रिकवरी के 7 दिन बाद अपनी क्षमता का 50% ही वर्कआउट करें वरना दिल-फेफड़ों को खतरा

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कोरोना से रिकवरी के 7 दिन बाद अपनी क्षमता का 50% ही वर्कआउट करें वरना दिल-फेफड़ों को खतरा https://ift.tt/39xHURB कोरोना से रिकवरी के बावजूद एक्सरसाइज के पुराने रूटीन पर कब लौटें? यह एक बड़ा सवाल है। अमेरिका के जाने-माने स्पोर्ट्स फिजिशियन डॉ. जॉर्डन मेट्जेल कहते हैं कि सामान्य धारणा यह है कि एक्सरसाइज के मामले में हमें अपने शरीर की सुननी चाहिए। यानी जब शरीर को लगे कि वह एक्सरसाइज करने के लिए फिट है, तभी हमें एक्सरसाइज करना चाहिए। लेकिन कोविड ने पुरानी सभी धारणाओं को खत्म कर दिया है। कोरोना के संक्रमण के बाद मरीजों को अपने पुराने रूटीन पर लौटने में समस्या आ रही है। सैकड़ों एथलीट अपनी पुरानी क्षमता पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्हें थोड़े से वर्कआउट के बाद ही थकान और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं आ रही हैं। डॉ. जॉर्डन कहते हैं कि कोरोना के बाद मायोकार्डिटिस जैसी समस्या सामने आ सकती है। यह वह स्थिति होती है, जब दिल की मांसपेशियों में सूजन आ जाती है। इससे दिल की क्षमता कमजोर हो जाती है। दिल के पंप करने की क्षमता घट जाती मायोकार्डिटिस में हार्ट और उसके इलेक्ट्रिकल सिस्टम को प्रभ...

खाने के शौकीन हैं तो 90/10 का नियम याद रखें, अपने वजन से ऐसे जानें रोज आपको कितनी कैलोरी चाहिए

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खाने के शौकीन हैं तो 90/10 का नियम याद रखें, अपने वजन से ऐसे जानें रोज आपको कितनी कैलोरी चाहिए https://ift.tt/3lkdi8p रोज आपको कितनी कैलोरी की जरूरत है उम्र, एक्टिविटी लेवल, बॉडी की बनावट, हेल्थ पर निर्भर है। आप हेल्दी हैं और रोजाना 30 मिनट एक्सरसाइज करते हैं तो पता चल सकता है कि मौजूदा वजन में बने रहने के लिए कितनी कैलोरी चाहिए। अपने कुल वजन (पाउंड में) में 15 से गुणा दे दीजिए। उदाहरण के लिए वजन 130 पाउंड है तो इसमें 15 से गुणा कर दीजिए। यानी आपको रोजाना 1950 कैलोरी चाहिए। एक पाउंड 450 ग्राम होता है। क्या इसमें कोई खतरा है? अगर खाने के नियम बार-बार तोड़े जाएं तो जरूर खतरा है। हार्वर्ड हार्ट लेटर के एडिटर इन चीफ डॉ. दीपक एल भट्‌ट कहते हैं कि एक बार में बहुत सी अनहेल्दी चीजें खाना शरीर में कई तरह के बायोकेमिकल बदलाव कर देता है। जैसे- खाने के बाद तुरंत ही ट्राईग्लिसराइड का बढ़ जाना। यह खाने के कुछ घंटों के बाद ही हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा सकता है। इसलिए बेहतर है कि हम स्वस्थ होने के बावजूद हेल्दी डाइट के नियम का पालन करते रहें। नियम तोड़ना है तो ये रूल जरूरी आप हमेशा हेल्दी डाइट लेते...

अब घर बैठे दवाई मांगना और डॉक्टर से परामर्श लेना हुआ बेहद आसन

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अब घर बैठे दवाई मांगना और डॉक्टर से परामर्श लेना हुआ बेहद आसन https://ift.tt/3mgNxa8 आज का दौर डिजिटाइजेशन का है, जिसमें अधिकतर काम ऑनलाइन, घर बैठे चंद मिनटों में आसानी से हो जाते हैं। चाहे भी फिर कपड़े खरीदना हो, किसी को बिल का भुगतान करना हो या किसी ट्रेन का टिकट करना हो। सभी काम आसानी से घर बैठे सिर्फ 1 क्लिक पर हो जाते हैं। यहां तक की जिस चिकित्सा क्षेत्र में इसे असंभव माना जाता था, वहां भी डॉक्टर से ऑनलाइन परामर्श और दवाइयों का ऑनलाइन ऑर्डर बड़ी आसानी से होने लगा है। कोरोना महामारी के बाद से समाज ने ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवाओं को धड़ल्ले से स्वीकार किया है। हालांकि,ऑनलाइन सामान या दवाइयां लेने से आपके साथ कई बार फ्रॉड भी हो जाता है या आप जो सामान या दवा मंगवाते हैं उसकी जगह कोई और दवाइयां आप तक पहुँचती है। लेकिन भारत के अपने हेल्थकेयर नेटवर्क मेडकॉर्ड्स” ने कस्टमरों के विश्वास को कायम रखा है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में जनता के लिए यह सबसे भरोसेमंद साबित हो रहा है। मेडकॉर्ड्स संस्था ने दो मोबाइल ऐप आम जनता और मेडिकल स्टोर्स के लिए शुरू किए हैं। "आयु ऐप" जो की आम जनता क...

बच्चों के खिलौनों, कार के इंटीरियर, सोफा में आग से बचाने के लिए जिन केमिकल का इस्तेमाल, उनसे कैंसर का बड़ा खतरा

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बच्चों के खिलौनों, कार के इंटीरियर, सोफा में आग से बचाने के लिए जिन केमिकल का इस्तेमाल, उनसे कैंसर का बड़ा खतरा https://ift.tt/3fES17R ड्यूक यूनिवर्सिटी की केमिस्ट डॉ. हीदर स्टेपल्टन अपने साथी से बेबी गियर में मिले ऐसे विषैले केमिकल पर चर्चा कर रही थीं, जो खिलौनों को आग से बचाने के लिए इस्तेमाल किए जाते है। उनका एक साल का बेटा पास ही खेल रहा था। इसी बीच दोनों यह देखकर चौंक गए कि उनका बेटा जिस पॉलिएस्टर टनल से खेल रहा था, उस पर भी एक टैग लगा था। इस पर लिखा था कि कपड़ा ज्वलनशील मानकों के हिसाब से तैयार किया गया है। यानी टेंट के कपड़े में केमिकल फ्लेम रिटार्डेंट इस्तेमाल किया गया था। यह केमिकल इंसान का डीएनए तक बदल सकता है डॉ. स्टेपल्टन ने उस कपड़े को अपनी लैब में टेस्ट किया, तो वे यह जानकर चौंक गईं कि कपड़े में फ्लेम रिटार्डेंट के रूप में क्लोरीनेटेड ट्रिस केमिकल का इस्तेमाल हुआ था। इस केमिकल का इस्तेमाल पायजामा बनाने वाले निर्माता सालों पहले बंद कर चुके थे क्योंकि यह कैंसर का कारण हो सकता था और डीएनए तक बदलने की क्षमता रखता था। क्या है फ्लेम रिटार्डेंट दरअसल, फ्लेम रिटार्डेंट ऐसे के...

शादीशुदा जिंदगी को इन टिप्स की मदद से बनाएं खूबसूरत, रखें इन बातों का खास ध्यान

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शादीशुदा जिंदगी को इन टिप्स की मदद से बनाएं खूबसूरत, रखें इन बातों का खास ध्यान https://ift.tt/2V6E3Cp नई दिल्ली। हर इंसान शादी के बाद अपनी नई जिंदगी को खूबसूरत बनाना चाहता है। जहां पर रहकर उसे हर वो चीज का ध्यान रखना जरूरी होता है जो उनकी जिंदगी को खुशहाल रख सके। लेकिन इसके बाद भी जिंदगी में छोटी-मोटी समस्याएं आ ही जाती है। लेकिन इस समस्या को इतनी बड़ी भी ना होने दे कि एक कच्चे धागे से बंधा रिश्ता टूटने की कगार पर आ जाए। यदि आप अपने रिश्ते को हमेशा के लिए खुशहाल बनाना चाहते है तो उन चीजों से दूर रहे जो आपके रिश्ते को खराब कर सकती है। ऐसे में चलिए जानते हैं किन बातों को ध्यान में रखकर आप अपने पार्टनर के साथ एक अच्छे रिश्ते की तरफ बढ़ सकती हैं। 1. समस्याओं पर खुलकर बात करें अपने पार्टनर के बीच हो रही तनातनी को लेकर रूठे नही, कुछ समय के बाद गुस्सा शांत करके अपने पार्टनर के साथ बात करें इसमें अपने इगो को सामने ना लाए। और अपनी समस्या को शांति के साथ उन्हें समझाए। इससे एक दूसरे की भावनाओं को आप लोग अच्छी तरह से समझेंगे। और रिश्ते में आई उलझन को दूर करने का रास्ता खोजेंगे। इससे आसानी ...

अमेरिका में अल्ट्रावॉयलेट लैम्प से घर-ऑफिस को सैनेटाइज करने में 7 लोगों की आंखें डैमेज हुईं

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अमेरिका में अल्ट्रावॉयलेट लैम्प से घर-ऑफिस को सैनेटाइज करने में 7 लोगों की आंखें डैमेज हुईं https://ift.tt/3ljhzZL अमेरिका में अल्ट्रावॉयलेट लैम्प से घर और ऑफिस को सैनेटाइज करने के दौरान 7 लोगों की आंखें डैमेज हो गईं। मरीजों की कॉर्निया में सूजन आई और दर्द से बेहाल रहे। यह बात मियामी मिलर स्कूल ऑफ मेडिसिन यूनिवर्सिटी की रिसर्च में सामने आई। वैज्ञानिकों का कहना है कि मरीज रिकवर हो रहे हैं लेकिन लोगों को अल्ट्रावॉयलेट (UV) लैम्प इस्तेमाल करने की सही जानकारी होना जरूरी है। ऐसी लापरवाही दोबारा होने पर आंखें जिंदगीभर के लिए डैमेज हो सकती हैं। आई एक्सपर्ट डॉ. जेस्सी सिंगिलो कहती हैं, महामारी की शुरुआत में हमारे पास आने वाले ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही थी, जिनकी आंखों में जलन थी और दर्द से परेशान थे। ये मरीज सामान्य रोशनी के सम्पर्क में आते ही सेंसिटिव हो जाते थे यानी इनकी दिक्कतें बढ़ जाती थीं। धीरे-धीरे मामले बढ़ने पर ये समझ आया कि अल्ट्रावॉयलेट लैम्प की रोशनी के सीधे सम्पर्क में आने पर मरीजों में ऐसा हो रहा है। 5 पॉइंट्स में समझें पूरा मामला ऑक्यूलर इम्यूनोलॉजी एंड इंफ्लेमेशन जर्नल...

सर्दियों में हार्ट अटैक रोकने के लिए सुबह पानी कम पिएं और वॉक करने से बचें; नमक कम लें

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सर्दियों में हार्ट अटैक रोकने के लिए सुबह पानी कम पिएं और वॉक करने से बचें; नमक कम लें https://ift.tt/2V6ziZq पब्लिक लाइब्रेरी ऑफ साइंस जर्नल में पब्लिश एक रिसर्च रिपोर्ट कहती है, जिन्हें पहले से हार्ट डिसीज है, सर्दी में उनमें हार्ट अटैक का खतरा 31 फीसदी तक बढ़ जाता है। आखिर ठंड में हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मामले क्यों बढ़ते हैं और कैसे इनका खतरा कम किया जा सकता है, बता रहे हैं सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुब्रतो मंडल... ठंड में खतरा क्यों बढ़ता है, पहले इसे समझिए सोते समय शरीर की एक्टिविटीज स्लो हो जाती हैं। बीपी और शुगर का लेवल भी कम होता है। लेकिन उठने से पहले ही शरीर का ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम उसे सामान्य स्तर पर लाने का काम करता है। यह सिस्टम हर मौसम में काम करता है। लेकिन ठंड के दिनों में इसके लिए दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे जिन्हें हार्ट की बीमारी है, उनमें हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। ...क्योंकि नसें ज्यादा सिकुड़ जाती हैं ठंड के मौसम में नसें ज्यादा सिकुड़ती हैं और सख्त बन जाती हैं। इससे नसों को गर्म और एक्टिव करने के लिए ब्लड का फ्लो बढ़ जाता है जिससे ब्लड प्रे...

रोबोट से कोरोना की जांच कराने की तैयारी, यह ECG और ब्लड टेस्ट भी करता है; मास्क न पहनने पर टोकता है

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रोबोट से कोरोना की जांच कराने की तैयारी, यह ECG और ब्लड टेस्ट भी करता है; मास्क न पहनने पर टोकता है https://ift.tt/2V6Iehs मिस्त्र में ऐसा रोबोट तैयार किया गया है जो कोविड-19 टेस्ट कर सकता है। इतना ही नहीं यह मरीज का तापमान चेक करता है और मास्क न पहनने वालों को चेतावनी भी देता है। कोविड टेस्ट के अलावा यह इकोकार्डियोग्राम (ECG), ब्लड टेस्ट और एक्स-रे भी करता है। जांच के परिणाम रोबोट के सीने पर लगी स्क्रीन पर भी देख सकते हैं। रोबोट का चेहरा और हाथ इंसानों जैसे इस रोबोट को उत्तरी काहिरा के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में तैयार किया गया है। इसका नाम Cira-03 रखा गया। इस रोबोट तैयार करने वाले महमूद अल-कौमी कहते हैं, यह वायरस के संक्रमण को रोकने में मदद करेगा। इसका चेहरा और हाथ इंसानों जैसे हैं। इसलिए यह ब्लड टेस्ट और ECG भी कर सकता है। मरीज का रोबोट से डर को खत्म करने की कोशिश मैंने इसे पूरी तरह से इंसानों की तरह दिखने वाला रोबोट बनाने की कोशिश की ताकि मरीज इससे डरें नहीं। उनका यह न लगे की कोई बक्सा उनके आगे पीछे घूम रहा है। मरीजों की तरह से पॉजिटिव रेस्पॉन्स से मैं खुश हूं। ऐसे करता है...

कोरोना लिक्विड लेयर की सतह पर कई दिनों तक जिंदा रहता है, मास्क लगाएं, दूरी बनाएं और हैंडवॉश करते रहें

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कोरोना लिक्विड लेयर की सतह पर कई दिनों तक जिंदा रहता है, मास्क लगाएं, दूरी बनाएं और हैंडवॉश करते रहें https://ift.tt/3790bBR कोरोना वायरस पतली लिक्विड लेयर से चिपककर सतह पर जीवित रहता है। यह दावा आईआईटी-बॉम्बे ने अपनी रिसर्च में किया है। रिसर्च के मुताबिक, यह घातक वायरस ठोस सतहों पर कई घंटे और कई दिन तक जिंदा रहता है। ‘फिजिक्स ऑफ फ्लूइड्स’ जर्नल में पब्लिश रिपोर्ट में बताया गया है कि ठोस सतहों पर कई दिन कई घंटे तक कैसे वायरस जीवित रहता है। ऐसे समझें पूरी रिसर्च वैज्ञानिकों का कहना है, आमतौर पर सांस के जरिए निकलने वाले सामान्य ड्रॉप्लेट्स कुछ सेकंड्स में सूख जाते हैं लेकिन किसी अलग-अलग सतहों पर मौजूद कोरोना कुछ घंटों तक जिंदा रहता है। आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर रजनीश भारद्वाज ने बताया, हमने रिसर्च नैनोमीटर वाली लिक्विड लेयर पर किया है। यह सतह पर खास तरह के फोर्स से चिपकती है, इसलिए कोरोना इस सतह पर घंटों जीवित रहता है। प्रोफेसर अमित अग्रवाल कहते है, पतली पर्त वाला मॉडल बताता है कि किसी भी सतह पर पतली पर्त का मौजूद होना और इसका सूखना तय करता है कि इस पर वायरस कितनी देर तक रहेगा।...

देश के 50% पुरुष और दो तिहाई शहरी महिलाओं को डायबिटीज होने का खतरा, 5 पॉइंट्स में समझें ऐसा क्यों

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देश के 50% पुरुष और दो तिहाई शहरी महिलाओं को डायबिटीज होने का खतरा, 5 पॉइंट्स में समझें ऐसा क्यों https://ift.tt/3m78unN देश के लोगों में डायबिटीज का खतरा घट नहीं रहा है। हाल ही में भारतीय वैज्ञानिकों की रिसर्च भी चौंकाने वाली है। रिसर्च कहती है, देश में 20 साल की उम्र वाले 50 फीसदी से अधिक पुरुष और दो तिहाई महिलाओं को जीवन में कभी न कभी टाइप-2 डायबिटीज हो सकती है। डायबिटोलॉजिया जर्नल में पब्लिश रिसर्च के मुताबिक, शहरी क्षेत्रों में रहने वाले भारतीय युवाओं में डायबिटीज होने का खतरा अधिक है। रिसर्च में शामिल दिल्ली के सेंटर फॉर क्रॉनिक डिसीज कंट्रोल के वैज्ञानिकों का कहना है, देश पहले से ही बीमारियों के बोझ तले दबा है। भारत में 7.7 करोड़ वयस्क डायबिटीज से जूझ रहे हैं। 2045 तक इनकी संख्या दोगुनी हो सकती है। 5 पॉइंट्स : डायबिटीज का खतरा क्यों, इसकी वजह भी जान लीजिए रिसर्चर्स के मुताबिक, शहरी क्षेत्रों में जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। इनके खानपान की क्वालिटी और फिजिकल एक्टिविटी घट रही है। अनफिट होता है शरीर और अनहेल्दी फूड एक नई महामारी ला सकते हैं। उम्र, जेंडर और बीएमआई के आधार पर...

दुनिया का सबसे गहरा स्विमिंग पूल पर्यटकों के लिए खुला, 45.5 मीटर गहरे पूल में मेहमानों के रहने की व्यवस्था भी

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दुनिया का सबसे गहरा स्विमिंग पूल पर्यटकों के लिए खुला, 45.5 मीटर गहरे पूल में मेहमानों के रहने की व्यवस्था भी https://ift.tt/3m8QV6M पोलैंड में दुनिया का सबसे गहरा स्विमिंग पूल ‘डीपस्पॉट’ पर्यटकों के लिए खुल गया है। इसकी गहराई 45.5 मीटर (150 फुट) है। पर्यटक डीप डाइविंग का अनुभव कर सकें इसलिए लिए इसमें इसमें अंडरवॉटर गुफाएं भी बनाई गई हैं। आमतौर पर एक सामान्य पूल 25 मीटर गहरा होता है। यहां मेहमानों के रुकने की भी व्यवस्था है। वे कमरे के अंदर से ही डाइविंग को देख सकते हैं। अभी तक सबसे गहरे पूल का रिकॉर्ड 42 मीटर गहरे इटली के मोंटेग्राटो पूल के नाम था। यह रिकॉर्ड अब टूट चुका है। पहले ही दिन 8 डाइवर्स पहुंचे 'डीपस्पॉट' पूल पोलैंड के सेंट्रल पॉलिश टाउन में बना है। यहां डाइवर्स को ट्रेनिंग भी दी जाएगी। शनिवार को पहली बार यह पर्यटकों के लिए खोला गया। पहले दिन यहां दर्जनों कस्टमर्स के साथ अंडरवाटर रोमांच का अनुभव करने के लिए 8 डाइवर्स भी पहुंचे। 'यहां डाइविंग सीखना मजेदार अनुभव' 39 साल के डाइविंग इंस्ट्रक्टर कैक्प्रजेक कहते हैं, इस पूल में मछलियां या कोरल रीफ मौजूद ...