Posts

Showing posts from July, 2020

कोरोना को हराने वाली 105 साल की असमा बीवी की कहानी, बेटी से संक्रमण फैला और तीन महीने तक इलाज के बाद अब घर लौटीं

Image
कोरोना को हराने वाली 105 साल की असमा बीवी की कहानी, बेटी से संक्रमण फैला और तीन महीने तक इलाज के बाद अब घर लौटीं https://ift.tt/2Xc3RhS केरल के कोल्लम में रहने वाली 105 साल की असमा बीवी 3 माह तक कोरोना से लड़ने के बाद घर लौटी हैं। असमा केरल की सबसे उम्रदराज कोरोना सर्वाइवर हैं। उन्हें 20 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। असमा बीवी को कोरोना का संक्रमण उनकी बेटी से हुआ था। बेटी का कहना है कि पूरे इलाज के दौरान मां ने कोरोना का डटकर मुकाबला किया। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उम्र अधिक होने के कारण वह पहले ही कई तरह की दिक्कतों से जूझ रही थीं, इस दौरान डॉक्टर्स में लगातार नजर बनाए रखी। स्वास्थ्य मंत्री ने उनके जज्बे की तारीफ की असमा बीवी ने जिस तरह कोरोना का डटकर मुकाबला किया है, उसके लिए केरल की स्वास्थ्यमंत्री केके शैलजा ने उनकी तारीफ की है। स्वास्थ्यमंत्री ने कहा, उन्होंने इस उम्र में जो जज्बा दिखाया वह काबिलेतारीफ है। स्वास्थ्यमंत्री ने डॉक्टर्स, नर्स और हेल्थ वर्कर्स का भी शुक्रिया अदा किया। केरल में बुधवार को कोरोना के 903 मामले सामने आए। इसमें हेल्थ वर्कर भी शामिल हैं...

18 फीट 8 इंच ऊंचाई के साथ 12 वर्षीय जिराफ सबसे ऊंचा, गिनीज ने कहा, इसकी लम्बाई को मापने के लिए विशेष खंभा बनाया गया

Image
18 फीट 8 इंच ऊंचाई के साथ 12 वर्षीय जिराफ सबसे ऊंचा, गिनीज ने कहा, इसकी लम्बाई को मापने के लिए विशेष खंभा बनाया गया https://ift.tt/313nv0J ऑस्ट्रेलिया के चिड़ियाघर में रहने वाले 12 साल के जिराफ ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। जिराफ का नाम फॉरेस्ट है। गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने फॉरेस्ट को दुनिया का सबसे ऊंचा ​जीवित जिराफ घोषित किया है। इसकी लम्बाई 18 फीट 8 इंच है। गिनीज के मुताबिक, जिराफ की लम्बाई को नापना बेहद मुश्किल रहा। इसके लिए स्टाफ को एक विशेष नाप वाला खंभा बनाना। यह जिराफ क्वींसलैंड के ऑस्ट्रेलिया जू में रहता है।, संरक्षणकर्ता स्टीव इरविन का परिवार करता है देखरेख क्वींसलैंड के ऑस्ट्रेलिया जू का संचालन दिवंगत ऑस्ट्रेलियाई संरक्षणवादी स्टीव इरविन का परिवार करता है। फॉरेस्ट ने जब गिनीज रिकॉर्ड बनाया तो इसकी घोषणा उनकी बेटी बिंडी इरविन ने की। यहां के चिड़ियाघर में हर साल 7 लाख लोग आते हैं। फॉरेस्ट का जन्म न्यूजीलैंड में हुआ था बिंडी कहती हैं कि इस जिराफ का जन्म 2007 में न्यूजीलैंड के ऑकलैंड जू में हुआ था और दो साल बाद इसे नए घर में ट्रांसफर किया गया था। यह काफी ऊंचा है। इसक...

5 साल से कम उम्र के बच्चों में बड़ी संख्या में कोरोनावायरस होने का खतरा, इनसे कम्युनिटी में ट्रांसमिशन होने की आशंका

Image
5 साल से कम उम्र के बच्चों में बड़ी संख्या में कोरोनावायरस होने का खतरा, इनसे कम्युनिटी में ट्रांसमिशन होने की आशंका https://ift.tt/3fnjdqg अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प स्कूलों को दोबारा खोलने पर जोर दे रहे हैं लेकिन शोधकर्ताओं ने संक्रमण का खतरा जताया है। अमेरिकी शोधकर्ताओं का कहना है कि 5 साल से कम उम्र के बच्चों में बड़ी संख्या में कोरोनावायरस मिल सकते हैं। ये संक्रमण की अहम वजह बन सकते हैं। यह दावा शिकागो में हुई रिसर्च में किया गया है। 5 साल से कम उम्र के 46 बच्चों पर हुई रिसर्च शोधकर्ताओं के मुताबिक, 23 मार्च से 27 अप्रैल तक 145 मरीजों का स्वैब टैस्ट कराया। इनमें कोरोना के हल्के लक्षणों से लेकर सामान्य लक्षणों वाले मरीज शामिल थे। इन मरीजों को उम्र के मुताबिक समूहों में बांटा गया। पहला समूह 5 साल तक की उम्र वाले 46 बच्चों का बनाया गया। दूसरा समूह 5 से 17 साल उम्र वाले 51 बच्चों का बनाया गया। तीसरा समूह 18 से 65 साल के 48 बच्चों को बनाया गया। कम उम्र के बच्चे कोरोना के वाहक बन सकते हैं शोधकर्ता टेलर हील्ड सार्जेंट के मुताबिक, इन बच्चों की सांस नली में अधिक संख्या म...

सुदर्शन क्रिया से छात्रों में तनाव और अवसाद घटा, सकारात्मक सोच में इजाफा हुआ; मानसिक स्वास्थ्य सुधरा

Image
सुदर्शन क्रिया से छात्रों में तनाव और अवसाद घटा, सकारात्मक सोच में इजाफा हुआ; मानसिक स्वास्थ्य सुधरा https://ift.tt/33ckNIX सुदर्शन क्रिया तनाव बेचैनी को घटने के साथ मन में सकारात्मक विचारों का प्रवाह बढ़ाती है। येल यूनिवर्सिटी की रिसर्च में यह बात सामने आई है। रिसर्च के मुताबिक, श्वसन तकनीक यानी सुदर्शन क्रिया से छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हुआ। फ्रंटियर्स इन सायकियाट्री जर्नल के मुताबिक, छात्रों को स्वास्थ्य के 6 क्षेत्रों अवसाद, तनाव, मानसिक स्वास्थ्य, सचेतन अवस्था, सकारात्मक प्रभाव और सामाजिक जुड़ाव में सुधार देखा गया। क्या है सुदर्शन क्रिया सुदर्शन क्रिया एक लयबद्ध श्वसन तकनीक है, जो आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यक्रमों में सिखाई जाती है। जो जीवकोषीय स्तर पर तनाव और भावनात्मक विष को दूर करती है। शोध यह दर्शाता है कि यह तकनीक नींद के चक्र को सुधारने, हैप्पी और फील गुड हार्मोन्स जैसे - ऑक्सीटोसिन के स्राव को सुधारने, तनाव उत्पन्न करने वाले हार्मोन्स,जैसे - कॉर्टिसोल के स्राव को कम करने का काम करती है। यह सजगता को बढ़ाने और चिकित्सीय अवसाद लक्षणों को कम करने में मदद करती है।...

रैपिड एंटीजन टेस्ट 20 मिनट में कोरोना की जांच करता है और आरटी-पीसीआर 12 घंटे में बताता है कि मरीज पॉजिटिव है या नहीं

Image
रैपिड एंटीजन टेस्ट 20 मिनट में कोरोना की जांच करता है और आरटी-पीसीआर 12 घंटे में बताता है कि मरीज पॉजिटिव है या नहीं https://ift.tt/3jUFnU5 देश में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं। इसकी एक वजह यह भी है कि देश में जांच का दायरा बढ़ रहा है। कोविड-19 की जांच के लिए कई तरह के टेस्ट किए जा रहे हैं। लेकिन ज्यादातर लोग इन जांच में फर्क नहीं समझ पा रहे हैं। जैसे आरटी- पीसीआर, रैपिड एंटीजन टेस्ट और ट्रू नेट टेस्ट में क्या अंतर यह कैसे समझें। जानिए कोरोना की कौन सी जांच कब कराएं... #1) आरटी- पीसीआर टेस्ट क्या है : कोरोना वायरस की जांच का तरीका है। इसमें वायरस के आरएनए की जांच की जाती है। आरएनए वायरस का जेनेटिक मटीरियल है। तरीका क्या है : नाक एवं गले के तालू से स्वैब लिया जाता है। ये टेस्ट लैब में ही किए जाते हैं। रिजल्ट आने में कितना समय लगता है : 12 से 16 घंटे एक्यूरेसी कितनी है : टेस्टिंग की इस पद्धति की विश्वसनीयता लगभग 60% है। कोरोना संक्रमण के बाद भी टेस्ट निगेटिव आ सकता है। मरीज को लक्षणिक रूप से भी देखा जाना जरूरी है। #2) रैपिड एंटीजन टेस्ट (रैट) क्या है : कोरोना संक्रमण के वा...

रात में बार-बार नींद का टूटना और कवरटें बदलते रहना है स्लीप एपनिया का लक्षण, सुबह सिर में दर्द महसूस हो दिन में नींद आए तो डॉक्टरी सलाह लें

Image
रात में बार-बार नींद का टूटना और कवरटें बदलते रहना है स्लीप एपनिया का लक्षण, सुबह सिर में दर्द महसूस हो दिन में नींद आए तो डॉक्टरी सलाह लें https://ift.tt/2X9IIow स्लीप एपनिया यानी नींद से जुड़ी एक गंभीर बीमारी। स्लीप एपनिया की स्थिति में हमारी नींद कई बार टूटती है। कई स्थितियों में तो सांस रुक भी सकती है। स्लीप एपनिया की स्थिति में हम कई बार करवटें बदलते रहते हैं। आप जानकर हैरान होंगे- देश की 13 फीसदी आबादी ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया से पीड़ित है। पुरुषों में 19.7%, वहीं महिलाओं में यह आंकड़ा 7.4% है। स्लीप एपनिया की स्थिति में एक घंटे में तीस या इससे ज्यादा बार भी सांस का रुकना या करवटें बदलने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। यह एक ऐसा विकार है, जिससे नींद से जुड़ी और समस्याएं भी खड़ी हो सकती हैं। उदाहरण के तौर पर- शोध बताते हैं, यदि आपकी रात की नींद एक घंटे भी कम हो जाए तो अगले दिन आपकी अलर्टनेस 32 फीसदी तक कम हो जाएगी। स्लीप एपनिया को समझने से पहले हमें, नींद को समझना जरूरी है। दरअसल, हमारी नींद तीन से चार चक्रों में पूरी होती है। हर चक्र लगभग पांच चरणों से गुजरता है। चौथा चरण सबसे गह...

महिला ने जिस दांत के दर्द को नजरअंदाज किया उसका संक्रमण बढ़कर मस्तिष्क तक पहुंचा, चलना-फिरना मुश्किल हुआ और मेमोरी घटी

Image
महिला ने जिस दांत के दर्द को नजरअंदाज किया उसका संक्रमण बढ़कर मस्तिष्क तक पहुंचा, चलना-फिरना मुश्किल हुआ और मेमोरी घटी https://ift.tt/30fEltS दांत में दर्द हो रहा है तो उसे नजरअंदाज न करें। यह संक्रमण हो सकता है जो बढ़कर दिमाग तक पहुंच सकता है। ब्रिटेन में एक ऐसा ही मामला सामने आया है। 35 साल की रेबेका डॉल्टन को चलने में तकलीफ हुई और धीरे-धीरे मेमोरी घटने के बाद हॉस्पिटल लाया गया। जांच करने पर मस्तिष्क में बैक्टीरिया का संक्रमण देखा गया। डॉक्टर्स ने भी उसके बचने की उम्मीद छोड़ दी थी। रेबेका को लगातार हॉस्पिटल में 5 महीने बिताने पड़े। डिस्चार्ज होने पर उन्होंने कहा, मुझे नया नजरिया मिला है, ये सीख बताती है कि आप कुछ भी हल्के में नहीं ले सकते। दांत के इलाज के बाद चलने-फिरने में दिक्कत हुई और मेमोरी घटी रेबेका का इलाज करने वाले डॉक्टर के मुताबिक, दिसम्बर 2019 में उसके दांतों में बैक्टीरिया का संक्रमण हुआ था। जिसे उन्होंने कई बार नजरअंदाज किया। यही बैक्टीरिया दांतों से दिमाग तक पहुंचा। मार्च में दांतों की समस्या का इलाज कर दिया गया था। लेकिन दिक्कत कुछ दिन बाद शुरू हुई जब रेबेका को चलन...

संक्रमण के दौरान 100 से 78 मरीजों में हार्ट डैमेज और दिल में सूजन की शिकायत हुई, कोरोना से उबरने पर 80 फीसदी को हृदय से जुड़ी दिक्कतें शुरू हुईं

Image
संक्रमण के दौरान 100 से 78 मरीजों में हार्ट डैमेज और दिल में सूजन की शिकायत हुई, कोरोना से उबरने पर 80 फीसदी को हृदय से जुड़ी दिक्कतें शुरू हुईं https://ift.tt/3jUF8bI कोरोना से उबरने के बाद भी वायरस के संक्रमण का असर लम्बे समय तक शरीर में दिख सकता है। अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल की रिसर्च यही बताती है। शोध के मुताबिक, कोरोना से उबरने वाले 80 फीसदी लोगों में हृदय से जुड़ी दिक्कतें देखी गई हैं। रिसर्च अप्रैल और जून के बीच में हुई थी। इसमें कोरोना के ऐसे मरीज शामिल थे जो संक्रमण से पहले स्वस्थ थे और उम्र 40 से 50 साल के बीच थी। 100 मरीजों पर हुई रिसर्च शोधकर्ताओं के मुताबिक, कोरोना से पीड़ित 100 लोगों पर रिसर्च की गई। इनमें से 67 मरीज ऐसे थे जो एसिम्प्टोमैटिक थे या इनमें बेहद हल्के लक्षण दिख रहे थे। अन्य 23 मरीजों को हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। मरीजों के हार्ट पर कोरोना का क्या असर पड़ रहा है इसे जानने के लिए एमआरआई, ब्लड टेस्ट और हार्ट टिश्यू की बायोप्सी की गई। 78 फीसदी मरीजों के दिल में सूजन शोधकर्ता क्लायड डब्ल्यू येंसी के मुताबिक, रिसर्च में सामने आया कि 100 में से 78 मरीज...

टोक्यो के रेस्तरां में ग्राहकों के बीच मॉडल कस्टमर बैठाए गए ताकि उन्हें अकेलेपन का अहसास न हो और फैमिली मेम्बर्स जैसा अहसास हो

Image
टोक्यो के रेस्तरां में ग्राहकों के बीच मॉडल कस्टमर बैठाए गए ताकि उन्हें अकेलेपन का अहसास न हो और फैमिली मेम्बर्स जैसा अहसास हो https://ift.tt/33aD9Kw टोक्यो के ज्यादातर रेस्तरां खाली पड़े हैं लेकिन यहां एक रेस्तरां ऐसा भी है जहां भीड़ नजर आती है। यह टोक्याे का मसातो टेकमाइन चाइनीज रेस्तरां है। यहां सोशल डिस्टेंसिंग को मेंटेन करने और अकेलेपन को दूर करने का अनोखा तरीका ढूंढा गया है। रेस्तरां में मॉडल कस्टमर (डमी) रखे गए हैं। जो आपको खाना खाते समय अकेलेपन का अहसास नहीं होने देते और परिजनों के साथ सोशल डिस्टेंसिंग भी बरकरार रखने में मदद करते हैं। जापानी ड्रेस में दिखे मॉडल कस्टमर रेस्तरां में 16 पुतलों को मॉडल कस्टमर के तौर पर रखा गया है। सभी मॉडल अलग-अलग मूड के हैं। कुछ ने जापानी पोशाक किमोनो पहन रखी है तो कुछ ने वेस्टर्न ड्रेस का पहना हुआ है। पहले सोशल डिस्टेंसिंग के लिए टेबल हटाई गई थीं रेस्तरां का कहना है कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए पहले टेबल हटाई गई थीं ताकि अधिक जगह हो जाए। लेकिन ऐसा करने पर यहां आने वाले लोगों को काफी अकेलापन महसूस होता था। ऐसा लगता था कि रेस्तर...

किसी ने दोस्तों को ग्रीटिंग कार्ड भेजने का चलन शुरू किया तो कहीं डिनर पार्टी से फ्रेंडशिप के सेलिब्रेशन की नींव पड़ी, अमेरिका में खुशकुशी की कहानी भी प्रचलित हुई

Image
किसी ने दोस्तों को ग्रीटिंग कार्ड भेजने का चलन शुरू किया तो कहीं डिनर पार्टी से फ्रेंडशिप के सेलिब्रेशन की नींव पड़ी, अमेरिका में खुशकुशी की कहानी भी प्रचलित हुई https://ift.tt/338QTW7 अगस्त के पहले रविवार को मनाए जाने वाले फ्रेंडशिप डे की शुरुआत दुनियाभर में अलग-अलग समय पर हुई लेकिन मकसद एक ही था एक दिन अपने दोस्त के नाम। इसे इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे का नाम दिया गया। इस दिन की शुरुआत कैसे हुई इसकी 3 कहानियां हैं। तीनों ही काफी दिलचस्प हैं। इस साल फ्रेंडशिप डे 2 अगस्त को मनाया जाएगा। जानिए इस खास दिन की शुरुआत से जुड़ी 3 कहानियां... पहली कहानी : एक व्यापारी ने एक-दूसरे को कार्ड देने की परंपरा शुरू की एक प्रचलित कहानी के मुताबिक, इस दिन की शुरुआत करने का श्रेय एक व्यापारी को जाता है। 1930 में जोएस हॉल नाम के व्यापारी ने सभी लोगों के लिए एक ऐसा दिन तय किया जब दो दोस्त एक-दूसरे को कार्ड दें और इस दिन को यादगार बनाएं। जोएस हॉल ने इसके लिए 2 अगस्त का दिन चुना। बाद में यूरोप और एशिया के कई देशों में फ्रेंडशिप डे मनाने की परंपरा शुरू हुई। दूसरी कहानी : डिनर पार्टी करके फ्रेंडशिप डे की नी...

कोरोनावायस हॉर्सशू चमगादड़ में 70 साल से सर्कुलेट हो रहा था लेकिन सब इससे बेखबर रहे, अमेरिकी शोधकर्ता का दावा

Image
कोरोनावायस हॉर्सशू चमगादड़ में 70 साल से सर्कुलेट हो रहा था लेकिन सब इससे बेखबर रहे, अमेरिकी शोधकर्ता का दावा https://ift.tt/3jVmj83 कोरोना पर एक और नई बात सामने आई है। अमेरिकी शोधकर्ता मेसीज बोनी का कहना है कि कोरोनावायस हॉर्सशू चमगादड़ में कई दशकों से सर्कुलेट हो रहा है। लेकिन इस बात से सब बेखबर रहे। इस समय महामारी के जो हालात हैं उसमें कोरोना की वंशावली को समझना बेहद जरूरी है ताकि स्वास्थ्यकर्मियों को इंसानों को बचाने में मदद मिल सके। शोधकर्ताओं के मुताबिक, वर्तमान में जो कोरोनावायरस महामारी फैला रहा है उसके पूर्वज चमगादड़ में 40 से 70 साल पहले से मौजूद थे। धीरे-धीरे ये इंसानों में पहुंचने के लिए तैयार हुए। कोरोना की लैब में तैयार होने पर सवाल उठाती है रिसर्च कोरोना और चमगादड़ के कनेक्शन पर दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने रिसर्च की है। शोधकर्ताओं ने रिसर्च में सामने आए नतीजे जारी किए हैं। पेन्सिलवेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता मेसीज बोनी के मुताबिक, चमगादड़ में दूसरे वायरस की मौजूदगी इंसानों में संक्रमण का खतरा और बढ़ा सकती है। यह रिसर्च कोरोना की उस थ्योरी पर सवाल उठाती है जिसमें ...

हेपेटाइटिस की दवा लेने वाले मरीजों में नहीं हुआ कोरोना का संक्रमण, पांच माह तक डेढ़ हजार लोगों पर हुई रिसर्च में किया दावा; अब बड़े स्तर पर ट्रायल की तैयारी

Image
हेपेटाइटिस की दवा लेने वाले मरीजों में नहीं हुआ कोरोना का संक्रमण, पांच माह तक डेढ़ हजार लोगों पर हुई रिसर्च में किया दावा; अब बड़े स्तर पर ट्रायल की तैयारी https://ift.tt/3jVwCZM काला पीलिया की दवा लेने वाले मरीजों में कोरोना का संक्रमण नहीं हुआ। दुनियाभर के कई देशों में भी काला पीलिया यानी हेपेटाइटिस की दवा कोरोना से बचाव करने में मददगार साबित हुई है। यह दावा PGIMS रोहतक की रिसर्च में किया गया है। यहां के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग और नेशनल वायरल हेपेटाइटिस सेंट्रल प्रोग्राम के मॉडल ट्रीटमेंट सेंटर में डेढ़ हजार मरीजों पर रिसर्च की गई। 5 माह तक मरीजों की हुई मॉनिटरिंग गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के हेड और सीनियर प्रोफेसर डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने दावा किया कि काला पीलिया की दवा कोविड-19 में कारगर हैं। 5 माह तक हेपेटाइटिस बी व सी का इलाज कराने वालों में डेढ़ हजार मरीजों को चिह्नित करके मार्च से जुलाई माह तक उनकी हेल्थ मॉनिटरिंग की गई। रिसर्च में शामिल डेढ़ हजार मरीजों ने नहीं दिखे लक्षण शोधकर्ताओं के मुताबिक, रिसर्च में पाया गया कि काला पीलिया की दवा लेने वाले डेढ़ हजार मरीजों को कोरोना स...

3 साल के रूसी बच्चे को चेन्नई के अस्पताल में कृत्रिम हार्ट और पम्प लगाए गए, अस्पताल पहुंचने से पहले उसे दो बार दिल का दौरा पड़ चुका था

Image
3 साल के रूसी बच्चे को चेन्नई के अस्पताल में कृत्रिम हार्ट और पम्प लगाए गए, अस्पताल पहुंचने से पहले उसे दो बार दिल का दौरा पड़ चुका था https://ift.tt/3g60GQe चेन्नई के एक निजी अस्पताल में 3 साल के रूसी बच्चे को कृत्रिम हार्ट और कृत्रिम पम्प लगाए गए गए। बच्चा अब स्वस्थ है। यह ट्रांसप्लांट एमजीएम हेल्थकेयर के डॉक्टरों ने किया है। रूसी बच्चे का नाम लेव फेडोरेंको है। वह रेस्ट्रिक्टिव कार्डियोमायोपैथी से जूझ रहा था। अस्पताल पहुंचने से पहले उसे दो बार दिल का दौरा पड़ चुका था। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Berlin Heart Implantation | Three-year-old Russian Boy Heart Transplant (Berlin Heart) In Chennai Hospital Amid दैनिक भास्कर,,1733 July 29, 2020 at 07:05PM Dainik Bhaskar https://ift.tt/1PKwoAf

शरीर से दुर्गंध क्यों आती है, वैज्ञानिकों ने ढूंढा कारण, कहा- आदिमानव के समय से आर्मपिट में पाई जाने वाली बैक्टीरिया दुर्गंध फैलाने वाला एंजाइम बनाती हैं

Image
शरीर से दुर्गंध क्यों आती है, वैज्ञानिकों ने ढूंढा कारण, कहा- आदिमानव के समय से आर्मपिट में पाई जाने वाली बैक्टीरिया दुर्गंध फैलाने वाला एंजाइम बनाती हैं https://ift.tt/3fgOWta शरीर से दुर्गंध क्यों आती है, वैज्ञानिकों ने इसका कारण पता लगा लिया है। वैज्ञानिकों का कहना है इसका कारण एक एंजाइम है जिसे आर्मपिट (बगल) में पाई जाने वाली बैक्टीरिया बनाती हैं। यही शरीर से दुर्गंध के लिए जिम्मेदार होता है। शोधकर्ताओं ने इसे बीओ एंजाइम नाम दिया गया है। यह रिसर्च ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क ने यूनिलिवर के साथ मिलकर की है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, स्ट्रेफायलोकोकस होमिनिस बैक्टीरिया खास तरह रसायन रिलीज करती है जो दुर्गंध की वजह बनता है। यह बैक्टीरिया आदिमानव के काल से इंसानों में है। इसलिए पीढ़ी तरह पीढ़ी इसने आर्मपिट में अपनी जगह बनाई है। डियोड्रेंट तैयार करने में मदद करेगी यह रिसर्च शोधकर्ता डॉ. गॉर्डन जेम्स के मुताबिक, यह रिसर्च कई नई बातें सामने लाई है। जैसे उस एंजाइम को खोजा गया जो सिर्फ आर्मपिट की बैक्टीरिया बनाती हैं। यह लाखों सालों से इंसानों में मौजूद हैं। इसकी पहचान होने के बाद अब ...

62 साल के पावेल ने 10 साल में तैयार की अपनी ट्रेन, स्टीम इंजन की तर्ज पर बनाई 350 मीटर लम्बी नैरो गेज; इसमें सफर करना लोगों के लिए पिकनिक जैसा

Image
62 साल के पावेल ने 10 साल में तैयार की अपनी ट्रेन, स्टीम इंजन की तर्ज पर बनाई 350 मीटर लम्बी नैरो गेज; इसमें सफर करना लोगों के लिए पिकनिक जैसा https://ift.tt/2D0PrKx रशिया के पावेल चिलीन ने अपना खुद का मिनी रेलवे तैयार किया है। 62 साल के पावेल इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं, इन्होंने 350 मीटर लम्बी नैरो गेज रेल तैयार की है। एक बड़े से मैदान में इसकी पटरी बिछाई गई हैं। यह एरिया सेंट पीटर्सबर्ग से 50 किलोमीटर की दूरी पर है। यह ट्रेन आपको रेल के सफर का यादगार अनुभव कराती है। इसे स्टीम इंजन की तर्ज तैयार किया गया है। अलग जगह से मेटल के पार्ट इकट्‌ठा करके ट्रेन की शक्ल दी पावेल ने इसे रेल को पसंद करने वाले लोगों के साथ मिलकर तैयार किया है। जिन्होंने अलग-अलग जगहों से मेटल के पार्ट इकट्‌ठा किए और इसे ट्रेन की शक्ल दी। ट्रेन को तैयार करने में 10 साल लग गए ट्रेन को तैयार होने में 10 साल का वक्त लगा है। यहां लोग अपनी फैमिली के साथ पहुंचते हैं और धीरे-धीरे चलने वाली रेल का आनंद उठाते हैं। बच्चों के साथ बड़ों को भी इस ट्रेन की यात्रा करना काफी पसंद है। खुद को रेलवे तैयार करके बचपन का सपना पूर...