वैज्ञानिकों ने बनाया हार्ट अटैक रोकने वाला इम्प्लांट और मशीन से तैयार हो रहीं हृदय की मांसपेशियां, जानिए वो इनावेशन वो बीमारी से लड़ने की ताकत दे रहे
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इनोवेशन और तकनीक ने हृदय रोगियों को बीमारी से निपटने की ताकत दी है। वैज्ञानिकों ने नई तरह हार्ट विकसित किया है और हार्ट अटैक रोकने वाला डिफ्रिबिलेटर्स भी बनाया है। आंखों को देखकर हृदय रोग बताने वाली तकनीक भी सामने आ चुकी है। आज वर्ल्ड हार्ट डे पर जानिए ऐसे ही इनोवेशन जो हार्ट डिसीज से लड़ने में हथियार की तरह काम कर रहे हैं....
सॉफ्ट रोबोट : दिल को धड़़कने में मदद करता है
हार्वर्ड विश्वविद्यालय और बोस्टन चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं ने एक सॉफ्ट रोबोट बनाया है, जो दिल के चारों ओर फिट हो सकता है। यह रोबोट दिल की मदद धड़कने में करता है। यह डिवाइस उन लोगों के लिए बहुत अधिक उपयोगी है, जिन्हें दिल का दौरा पड़ चुका है और इस वजह से उनका दिल कमजोर हो गया है। यह डिवाइस इन लोगों में हार्टफेल के खतरे को कम करती है। यह खून को पतला करने वाली दवाओं की आवश्यकता को खत्म कर देती है।
डिफ्रिबिलेटर्स : अचानक आने वाले हार्ट अटैक को रोकता है
चेक गणराज्य के प्राग में ना होमोलस अस्पताल के शोधकर्ताओं ने इम्प्लांटेबल डिफ्रिबिलेटर्स बनाई हैं। ये डिवाइस अचानक आने वाले हार्ट अटैक को रोक सकती है। वर्तमान डिफिब्रिलेटर के विपरीत नई डिवाइस में मेटल पल्स जनरेटर को चमड़े के पॉकेट की आवश्यकता नहीं होती है। इसमें लचीले स्ट्रिंग आकार की डिवाइस का उपयोग होता है, जिसमें दिल पर कोई लीड नहीं लगानी पड़ती। इसे लगाने में सिर्फ 20 मिनट का वक्त लगता है।

एआई एल्गोरिदम : आंखों को देखकर बताएगा हार्ट डिसीज
गूगल के रिसर्चर और उसकी हैल्थ केयर सबसीडियरी वर्ली के शोधकर्ताओं ने आर्टिफिशियल एल्गोरिदम विकसित किया है, जो आंखों के अध्ययन के आधार पर बता सकेगा कि व्यक्ति को हार्ट की बीमारी है या नहीं। इस तकनीक को विकसित करने के लिए वैज्ञानिकों ने 3 लाख रोगियों के डेटाबेस को देखा और पैटर्न को स्कैन किया। तकनीक 70% सटीकता से भविष्यवाणी कर सकती है कि मरीज को अगले 5 वर्षों में दिल की समस्या होगी या नहीं।
3 डी बायोप्रिंटेड हार्ट टिश्यू : हार्ट की मांसपेशियां बनाती है मशीन
शिकागो स्थित बायोटेक स्टार्टअप बायोलिफ 4 डी ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जिससे इंसान के हार्ट की मांसपेशियों के पैच को बायोप्रिंट किया जा सकता है। इन मांसपेशियों को हार्ट की मृत मांसपेशी की जगह लगाया जा सकता है। इससे हार्ट अटैक के मरीजों को तेज रिकवरी में मदद मिलेगी। यह मांसपेशी मरीज की रक्त कोशिकाओं को स्टेम कोशिकाओं में फिर से शामिल करने में मदद कर सकती है।

ई-टैटू : धड़कन मापने के लिए छाती पर लगाए जा सकते हैं
ई टैटू बेहद स्लिम, स्ट्रेचेबल डिवाइस है, जो छाती पर अटैच हो सकती है। यह दिल की धड़कनों को मापती है। यह डिवाइस स्मार्टफोन से दूर से नियंत्रित की जा सकती है और इसे कई दिनों तक पहना जा सकता है। यह टैटू इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफ और सिस्मोकार्डियोग्राफ पर भी नजर रखता है। दोनों मापों काे मिलाकार ई-टैटू दिल के स्वास्थ्य का अधिक सटीक मूल्यांकन करता है। इसे टेक्सास यूनिवर्सिटी ने बनाया है।
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दैनिक भास्कर,,1733
September 29, 2020 at 12:33PM
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