कोरोना से रिकवरी के बाद दिमाग में खून के 400 थक्के मिले, मरीज कोमा में पहुंचा; देश का पहला ऐसा मामला
https://ift.tt/37TtjOV
कोरोना से जूझने के बाद दिमाग में खून के थक्के जमने का मामला सामने आया है। यह देश का पहला ऐसा मामला है। जम्मू के रहने वाले 55 साल के मिथिलेश लम्ब्रू कोरोना से रिकवरी के बाद कोमा में चल गए थे। डॉक्टर्स का कहना है, मरीज पोस्ट कोविड एनसेफेलाइटिस से जूझ रहा था। उसके दिमाग में खून के 400 थक्के मिले थे। मिथिलेश का इलाज दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में किया गया।
कब, क्या हुआ, पढें पूरा मामला
कुछ महीने पहले मिथिलेश कोरोना से संक्रमित हुए। लक्षण हल्के थे, इसलिए वो घर में ही क्वारेंटाइन हो गए। धीरे-धीरे हालत बिगड़ी। सांस लेने में तकलीफ होने पर उन्हें जम्मू के अस्पताल में भर्ती किया गया। जांच में सामने आया कि कोरोना के कारण उन्हें निमोनिया हो गया। डॉक्टर्स ने इसे कोविड-निमोनिया बताया और मरीज को वेंटिलेटर रखा।
मरीज डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से भी जूझ रहा था। नाजुक होती स्थिति को कंट्रोल करने के लिए स्थानीय डॉक्टर्स ने इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल की टीम से सम्पर्क किया। यहां से डॉक्टर्स की टीम बनाकर जम्मू भेजी गई। जो मरीज के ऑक्सीजन लेवल को कंट्रोल करते हुए उसे एयर एम्बुलेंस के जरिए दिल्ली लाई।
मरीज को दिल्ली लाने के बाद इलाज के लिए 1 दिसम्बर को सीनियर पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. राजेश चावला के नेतृत्व में डॉक्टर्स की एक टीम बनाई गई। डॉ. राजेश चावला ने भास्कर को बताया, जब टीम जम्मू पहुंची तो मरीज की हालत नाजुक थी। फेफड़ों पर निमोनिया का असर बहुत ज्यादा था। इसलिए पहले इस स्थिति को सामान्य किया गया फिर उसे दिल्ली लाया गया।
वेंटिलेटर से हटाने के बाद नहीं आया होश
अपोलो के कोविड आईसीयू वार्ड में मरीज को भर्ती किया गया। 2 दिन के अंदर कोविड-निमोनिया के लक्षणों में कमी आने लगी। कोरोना का दिमाग पर गहरा असर होने के कारण मरीज अचानक कोमा में चला गया।
सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. विनीत सूरी का कहना है, आमतौर पर जब कोविड-निमोनिया से ठीक होने वाले मरीज़ को वेंटिलेटर से हटाया जाता है तो कुछ घंटे बाद उसे होश आ जाता है लेकिन मिथिलेश के साथ ऐसा नहीं हुआ।
उनकी MRI करने पर पता चला कि उनके दिमाग में 400 से ज्यादा खून के थक्के जमे थे।
विज्ञान की भाषा में इसे कोविड एनसेफेलाइटिस कहते हैं। इसका इलाज शुरू हुआ। इम्यून थैरेपी और स्टेरॉयड दिए गए। मरीज की हालत में सुधार हुआ और 7 दिन के अंदर वह होश में आ गया। कुछ दिनों तक हाथ-पैर में कमजोरी दिखी।
मरीज की दोबारा MRI की गई। रिपोर्ट में सामने आया कि वह 50 फीसदी से अधिक ठीक हो गए हैं। 26 दिसम्बर को मरीज डिस्चार्ज कर दिया गया।
ये भी पढ़ें
- कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आती रही लेकिन दर्द, कमजोरी और थकान के लक्षणों के साथ फेफड़ों में संक्रमण बढ़ता रहा
- इंसान की स्किन पर 9 घंटे तक जिंदा रह सकता है कोरोना, घर में एंट्री करें तो हाथों को सैनेटाइज करें
- सूरत में संक्रमित 241 माताओं से सिर्फ 13 नवजात को कोरोना, डॉक्टर बोले; मां के दूध में इतनी ताकत कि बच्चों को समस्या नहीं हुई
- जर्मनी के वैज्ञानिकों ने लैब में बनाई कोरोना से लड़ने वाली सबसे असरदार एंटीबॉडी, चूहे पर सफलता के बाद अब इंसानों को देने की तैयारी
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
दैनिक भास्कर,,1733
December 29, 2020 at 08:51PM
Dainik Bhaskar
https://ift.tt/1PKwoAf
Comments
Post a Comment